किन्नौर में बादल फटने से हाहाकार, लोगों ने सुनाई दिल दहला देने वाली दास्तां
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में बादल फटने से भारी तबाही, खेत-बागीचे और घर बह गए, लोग जान बचाने को रातों-रात घर से निकलने पर मजबूर हुए।

हिमाचल प्रदेश का किन्नौर जिला शुक्रवार सुबह एक बड़ी प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया जब अचानक पहाड़ों पर बादल फटने से गांवों में तबाही मच गई। तेज़ बारिश और मलबे के सैलाब ने खेत-बागीचे तक बहा दिए। आलू और सेब से भरे बगीचे जो यहां की पहचान माने जाते हैं, कुछ घंटों में तबाह हो गए। हालात ऐसे बने कि लोगों को अपने घर और पुश्तैनी ज़मीन तक छोड़कर जान बचाने के लिए भागना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि आधी रात को अचानक ज़बरदस्त आवाज़ आई और देखते ही देखते पानी-कीचड़ और बोल्डर गांव की तरफ दौड़ते चले आए। घरों के अंदर घुसा पानी इतना तेज़ था कि कई जगह दीवारें गिर गईं। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से बह गईं। वहीं बाग़ों में लगे सेब के पेड़ जड़ से उखड़ गए। स्थानीय लोग रो-रोकर अपनी तबाही का हाल बयान करते दिखाई दिए।
स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंची हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है। हालांकि पहाड़ी रास्ते बंद होने और मौसम लगातार खराब रहने से बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। गांवों के लोग स्कूलों और पंचायत भवनों में शरण लिए हुए हैं।
पिछले कुछ सालों में किन्नौर बार-बार प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन और लगातार हो रहे ग्लेशियर पिघलने से पहाड़ियों में बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। लोगों की यादें 2021 की भी ताज़ा हो गईं जब किन्नौर में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था और कई जानें गई थीं।
प्रशासन ने अपील की है कि लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और अफवाहों पर ध्यान न दें। हरसंभव मदद पहुंचाने की कोशिश जारी है। इस अचानक आई त्रासदी ने लोगों की ज़िंदगी और आजीविका दोनों पर गहरा असर डाला है।
