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Haryana Assembly : हरियाणा विधानसभा में मनीषा केस पर सियासी संग्राम: कांग्रेस का हंगामा, CM ने किया पलटवार, सदन 6 बार स्थगित

Haryana Vidhan Sabha : भिवानी की लेडी टीचर मनीषा की मौत को लेकर हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में भारी हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों ने पोस्टर लहराए, वहीं CM ने कांग्रेस सरकार पर FIR को लेकर बड़ा बयान दिया। पढ़ें पूरी खबर।

Haryana Assembly : हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही सियासी तापमान चढ़ गया। भिवानी की लेडी टीचर मनीषा की रहस्यमयी मौत को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया। जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, कांग्रेस विधायक “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे लिखे पोस्टर लेकर खड़े हो गए और काम रोको प्रस्ताव पेश कर दिया। पूरा माहौल शोर-शराबे से गूंज उठा, नतीजा ये रहा कि विधानसभा को कुल छह बार स्थगित करना पड़ा।Congress Protest Haryana

कांग्रेस का साफ आरोप था कि मनीषा केस की जांच में सरकार नाकाम रही है और पीड़िता के परिवार को न्याय नहीं मिल पाया है। सदन में महिला सुरक्षा और इंसाफ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि “बेटियों के लिए बड़े-बड़े नारे लगाने वाली सरकार, असल में बेटियों की सुरक्षा पर फेल साबित हुई है।” यह आरोप पूरे विपक्ष को एक सुर में सत्ता के खिलाफ खड़ा कर गया।

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इधर, हंगामे के बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस कार्यकाल को घेरते हुए कहा कि “कांग्रेस के टाइम तो FIR भी दर्ज नहीं होती थी, आज हम पारदर्शिता से काम कर रहे हैं।” खट्टर ने साफ किया कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच करा रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

असल में, भिवानी की अध्यापिका मनीषा की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य में भावनाओं को हिला दिया है। परिवार और समाज लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर इस मौत की सच्चाई सामने क्यों नहीं आ रही। विपक्ष इन्हीं भावनाओं को हवा देकर सरकार पर घेरा कस रहा है। विधानसभा जैसे संवेदनशील मंच पर इस मुद्दे के उठने से अब पूरे हरियाणा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

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सत्र के पहले ही दिन जिस अंदाज में सदन बाधित हुआ, उससे यह साफ हो गया है कि मानसून सत्र अब केवल कार्यसूची का मंच नहीं रहेगा, बल्कि कांग्रेस बनाम बीजेपी-जेजेपी गठबंधन की सियासी जंग का अखाड़ा बन गया है। कांग्रेस इस मुद्दे को जनमानस से सीधे जोड़कर सत्ता पर दबाव बनाना चाहती है, वहीं सरकार इसे कानून व्यवस्था और विकास के आंकड़ों के जरिए बैलेंस करने की कोशिश कर रही है।Haryana Breaking News

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि मनीषा केस आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा और हवा को भी प्रभावित कर सकता है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा जिस राज्य से चला, वहीं बेटियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होना सत्ताधारी दल के लिए चुनौती है।

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फिलहाल, सदन की कार्यवाही जहां बार-बार बाधित हुई, वहीं जनता इसी इंतजार में हैं कि ‘क्या मनीषा को न्याय मिलेगा’ या फिर यह मामला भी सिर्फ राजनीति का हथियार बनकर रह जाएगा।

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