Haryana Doctors Strike: हरियाणा में डॉक्टरों की बड़ी हड़ताल: क्यों भड़के सरकारी डॉक्टर? जानिए पूरा मामला
हरियाणा के सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं को झकझोर दिया है। प्रमोशन, सैलरी ग्रेड पे और भर्ती नीति में बदलाव को लेकर डॉक्टरों का विरोध तेज़। सरकार ने लगाया एस्मा, लेकिन डॉक्टर अब भी डटे हुए हैं।

Haryana Doctors Strike: हरियाणा में इस वक्त सबसे गर्म मुद्दा बना हुआ है सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल। राज्यभर के अस्पतालों में मरीज लाइन में हैं लेकिन डॉक्टर ओपीडी से बाहर, सड़कों पर नजर आ रहे हैं। वजह साफ है — प्रमोशन और सैलरी ग्रेड पे को लेकर जारी नाराजगी। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और दो टूक कह दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी।
करीब तीन हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर इस प्रदर्शन में शामिल हैं। उनका सबसे बड़ा गुस्सा प्रमोशन सिस्टम को लेकर है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्षों से जो सिस्टम चला आ रहा है, उसमें सीनियरिटी और मेहनत का कोई मूल्य नहीं बचा। सीनियर पदों पर सीधी भर्ती होने की वजह से पहले से काम कर रहे डॉक्टरों का प्रमोशन रुक जाता है, जिससे सिस्टम के प्रति असंतोष लगातार बढ़ा है। डॉक्टर चाहते हैं कि सीधी भर्ती की प्रथा पर रोक लगे और योग्य डॉक्टरों को प्रमोशन का हक़ दिया जाए।
सिर्फ प्रमोशन ही नहीं, सैलरी का मामला भी उतना ही गंभीर है। डॉक्टरों के अनुसार, हरियाणा में मिलने वाला ग्रेड पे बाकी राज्यों से काफी कम है। पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब, दिल्ली और राजस्थान के मुकाबले हरियाणा के डॉक्टरों को 10 से 15 हज़ार रुपये कम वेतन मिलता है। उनका कहना है कि लंबी ड्यूटी और कठिन परिस्थितियों में काम करने के बावजूद उन्हें न्यायोचित वेतन नहीं मिल रहा।
| डॉक्टरों की प्रमुख मांगें | विवरण |
|---|---|
| प्रमोशन नीति में बदलाव | सीनियर पदों पर सीधी भर्ती बंद हो और आंतरिक प्रमोशन पर जोर दिया जाए |
| ग्रेड पे बढ़ाना | पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर सैलरी स्ट्रक्चर सुधारा जाए |
| एस्मा हटाया जाए | डॉक्टरों पर लगाए गए सेवा अनुरक्षण अधिनियम को वापस लिया जाए |
सरकार की ओर से हालात को संभालने की कोशिशें जारी हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने एस्मा (Essential Services Maintenance Act) लगा दिया है। इसका मतलब है कि फिलहाल छह महीने तक जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते। साथ ही “काम नहीं तो वेतन नहीं” का निर्देश भी जारी किया गया है। लेकिन डॉक्टरों ने भी साफ कह दिया है कि “जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”
इस हड़ताल का असर अब गहराता जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं ठप पड़ी हैं, ग्रामीण इलाकों में मरीजों को भारी दिक्कत हो रही है और स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी “#HaryanaDoctorsStrike” ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग डॉक्टरों से लेकर सरकार तक सभी को जमकर घेर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि सरकार और डॉक्टरों के बीच कब सहमति बन पाती है। फिलहाल हरियाणा का मेडिकल सिस्टम इस संघर्ष के बीच अपनी सांसें रोके हुए है।
