Haryana Crime News: MDU रोहतक में महिला कर्मचारियों से पीरियड्स का सबूत मांगने का भयंकर मामला!
रोहतक के महार्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में महिला सफाई कर्मचारियों को पीरियड्स का सबूत दिखाने के लिए कपड़े उतरवाकर फोटो खिंचवाने का विवाद, दो सुपरवाइजर सस्पेंड, महिला आयोग और पुलिस ने ली संज्ञान।

Haryana Crime News: रोहतक की महार्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में एक बेहद शर्मनाक और विवादित मामला सामने आया है, जिसमें महिला सफाई कर्मचारियों से उनके पीरियड्स के सबूत के रूप में कपड़े उतरवाकर फोटो खींचवाने का आरोप लगा है। यह घटना 26 अक्टूबर 2025 को हुई, जब हरियाणा के राज्यपाल अशिम कुमार घोष के विश्वविद्यालय दौरे की तैयारी चल रही थी। उस दिन दो महिला सफाई कर्मचारी काम में देरी से पहुंचीं, जब उनके पुरुष सुपरवाइजरों ने उन्हें पीरियड्स का सबूत देने को कहा।
MDU Rohtak Scandal: महिला कर्मचारियों ने सूचित किया कि वे माहवारी की समस्या की वजह से देरी से आई थीं, लेकिन सुपरवाइजरों ने उन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और उनमें से एक महिला से अन्य महिलाओं के कपड़े उतरवाकर सेनेटरी पैड की फोटो और वीडियो बनवाई। इस अमानवीय और घरेलू स्तर पर अस्वीकार्य व्यव्हार के खिलाफ महिला कर्मचारी भड़क उठीं और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला जल्दी ही पूरे कैंपस में फैल गया, छात्र संगठन और कर्मचारी भी विरोध में शामिल हो गए।
इस गंभीर घटना की जानकारी मिलने के बाद, महार्षि दयानंद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो सफाई कर्मचारियों के सुपरवाइजरों विनोद और जितेंद्र को निलंबित कर दिया। साथ ही, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कृष्णकांत गुप्ता और वाइस-चांसलर राजवीर सिंह ने खुद पीड़ित महिला कर्मचारियों से मिलकर मामले की जांच का आश्वासन दिया। ह्यूमैन राइट्स आयोग और महिला आयोग ने भी रिपोर्ट मांगी है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने भी इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है जिसमें यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा भंग करने और धमकी देने जैसे कई गंभीर आरोप शामिल हैं।
यह घटना महिलाओं के प्रति ग़ौरोअन न करने वाले मानसिकता और यौन उत्पीड़न की एक निंदनीय मिसाल बनी है। इसके विरोध में सफाई कर्मचारी, छात्र और कर्मचारी संगठन लगातार खड़े हैं, यूनिवर्सिटी में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की मांग कर रहे हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष रेनु भाटिया ने इसे “बेहद घृणित” घटना करार दिया और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की बात कही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी साफ किया है कि किसी भी स्थिति में महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह घटना ना केवल एक स्थानीय विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि समूचे देश के लिए महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और कार्यस्थल की गरिमा के लिए एक चेतावनी है। पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलवाने और ऐसे कृत्यों को पुनः न होने देने के लिए सबकी सक्रियता और सख्त कदमों की जरूरत है।
