“दिल्ली में मेट्रो स्टेशन पर सैनेटरी मशीनें गायब और पानी में डूबे प्लेटफॉर्म – हाईकोर्ट ने DMRC को दिए 2 हफ्ते के अल्टीमेटम”
“दिल्ली मेट्रो में प्लेटफॉर्म पर पानी की भरमार और सैनेट्री मशीनों की कमी से यात्रियों को हो रही दिक्कतों पर सुप्रीम कोर्ट से भी बढ़कर, हाईकोर्ट ने DMRC को सिर्फ दो हफ्ते में जवाबी रिपोर्ट देने को कहा है।”

दिल्ली मेट्रो, जो शहरवासियों की रोज़मर्रा की रफ्तार और सुविधा का प्रतीक है, अभी उसी रफ्तार में ठिठक सी गई है—क्योंकि प्लेटफॉर्म पर पानी खड़ा है और सैनेट्री मशीनें लापता हैं। मामला इतना गंभीर हो गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने DMRC (दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन) को दो हफ्तों के अंदर पूरी रिपोर्ट देने का आदेश दे डाला है।
मैं पिछले दो दिनों से स्टेशन पर खड़े यात्रियों से बातचीत कर रहा हूँ, और हालात वाकई हैरान करने वाले हैं। पहले से ही तेज़ बारिश की वजह से जब जलभराव हो रहा हो—तो प्लेटफॉर्म पर पांव धँसते देखना कोई आसान बात नहीं होती। और ऊपर से सैनेट्री मशीनों का न मिलना, महिलाओं समेत सभी के लिए असहज और अस्वस्थजनक है। एक एटीएम की तरह सुविधा होनी चाहिए, लेकिन दिल्ली मेट्रो ने यह मूलभूत सुविधा ही छोड़ दी।
उधर, DMRC का कहना है कि सैनेटरी मशीनों की कमी साधारण नियोजन त्रुटि के चलते हुई है और जलभराव की समस्या विशेष सिचुएशन में बनी। उन्होंने साफ़ किया कि रिपोर्ट और सुधार की पूरी कोशिश हो रही है। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा, “आपका यह बहाना स्वीकार्य नहीं, रिपोर्ट दो हफ्तों में दीजिए, योजनाबद्ध सुधार भी बताइए।”
यह सुनते ही यात्रियों में एक उम्मीद जागी है—शायद अब कुछ तेजी आये। आखिर, सार्वजनिक परिवहन का जो मूल मकसद है—सुरक्षा, स्वच्छता और सहजता—वहीं हर रोज़ यात्रियों को मिलना चाहिए। लेख लिखते वक्त मुझे यह चिंता होती है कि क्या अगले दो हफ्तों में DMRC ठोस कदम उठाएगा या फिर ये ही हालात दोहराए जाएँगे?
हेडलाइन क्रंच और भावनात्मक थ्रिलर:
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प्लेटफॉर्म पर डूबती भीड़, पानी में दिशाहीन यात्रियों का संघर्ष।
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सैनेटरी मशीनों का अभाव: सुविधा से वंचित होना सम्मान की कमी भी है।
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हाईकोर्ट की सख्ती: रिपोर्ट देनी पड़ेगी, जवाबदेही तय करनी होगी।
इस कहानी में न केवल तकनीकी चूक है, बल्कि प्रशासन की जिम्मेदारियों की भी पोल खुलती नजर आती है। DMRC को यह स्पष्ट करना होगा कि अगले दो हफ्तों में क्या सुधरा जाएगा—बिना बहानों के, बिना इंतज़ार के। और यात्रियों को यही उम्मीद है कि दिल्ली मेट्रो फिर से भरोसेमंद, सुरक्षित और सुविधा से भरपूर बनकर उभरेगी।
