Breaking News: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने किया 2900 किलो विस्फोटक समेत सफेदपोश डॉक्टरों के आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 2900 किलोग्राम विस्फोटक और हथियार बरामद कर तीन डॉक्टर समेत आठ संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया। जानिए इस बड़े आतंकी मॉड्यूल की पूरी कहानी।

Breaking News: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़े आतंकवादी जाल को बेनकाब किया है, जिसमें लगभग 2900 किलोग्राम विस्फोटक बनाने का सामान बरामद हुआ है। यह आतंकवादी नेटवर्क जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़ा था, जिसमें तीन डॉक्टर समेत आठ संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। इस ‘वाइट कॉलर’ यानी सफेदपोश मॉड्यूल का तार जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।
इस कार्रवाई के दौरान विस्फोटक बनाने वाले 2900 किलोग्राम सामग्री के साथ-साथ केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, रिमोट कंट्रोल, टाइमर, बैटरियां, तार और मेटल शीट्स जैसे कई हथियार और विस्फोटक उपकरण भी पुलिस ने कब्जे में लिए। गिरफ्तार किये गए डॉक्टरों में से एक, डॉ. मुजाहिल शकील, हरियाणा के फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी में शिक्षक थे। एक महिला डॉक्टर भी इस नेटवर्क से जुड़ी पाई गई, जिनके वाहन से भी हथियार बरामद हुए।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई श्रीनगर के बनपोरा नौगाम में मिले जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टरों की जांच के सिलसिले में शुरू हुई, जिसमें पुलिस और सुरक्षाबलों को धमकी देने वाले संदेश थे। इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) समेत कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई। जांच में यह पता चला कि यह आतंकी मॉड्यूल तकनीकी रूप से बेहद संगठित था और इसने देश के कई राज्यों में अपनी जड़ें फैला रखी थीं।
जांच में पाए गए हथियारों की सूची में एक AK-56, एक AK Krinkov, एक बराटा पिस्टल, एक चीनी स्टार पिस्टल और उनके लिए आवश्यक गोलियां शामिल हैं। परिषद की बड़ी सफलता रहित इस मामले ने देश की सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और मिलकर काम करने की क्षमता को भी साबित किया है। कार्रवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर के कई जिलों के साथ-साथ हरियाणा के फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में संयुक्त छापेमारी की गई।
यह आतंकवादी साजिश विफल करने के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्र सरकार की एजेंसियों ने कड़ी मेहनत की है। इस ‘सफेदपोश’ टेरर नेटवर्क की कई परतें खोलने का काम अभी भी जारी है, जिसमें वित्तीय प्रवाह और विदेशों से संपर्क के लिंक भी ट्रेस किए जा रहे हैं।
