Ayushman Bharat Haryana: हरियाणा के 675 निजी अस्पतालों में इलाज बंद का एलान, सरकार के साथ आज निर्णायक बैठक
हरियाणा के 675 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना में बकाया भुगतान को लेकर इलाज बंद करने के मूड में हैं, आज सरकार संग अहम बैठक होगी।
Ayushman Bharat Haryana: हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राज्य के 675 निजी अस्पतालों ने इलाज बंद करने की चेतावनी दे दी है। वजह साफ है—सरकार की तरफ से बकाया भुगतान नहीं हुआ है। आईएमए के पूर्व प्रधान डॉ. अजय महाजन ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की नीयत और नीतियों पर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 15 जुलाई तक का करीब 500 करोड़ रुपये का भुगतान करने का वादा किया था, लेकिन अब सिर्फ 310 करोड़ की मंजूरी दी गई है। वो भी अस्पतालों तक पहुंचने में एक महीने से ज्यादा का वक्त लग जाएगा।
अब सोचिए, अगर ये अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत इलाज देना बंद कर देंगे तो क्या होगा? सबसे ज्यादा मार गरीब मरीजों पर पड़ेगी, जो इसी योजना के भरोसे अपनी गंभीर बीमारियों का इलाज करवा रहे हैं। कई ऐसे मामले हैं जहां कैंसर, हार्ट और किडनी से जूझ रहे मरीजों का पूरा इलाज इसी योजना से हो रहा है। ऐसे में अगर अस्पताल पीछे हटते हैं, तो सरकार के लिए ये बड़ा झटका हो सकता है।
डॉ. महाजन ने बताया कि अस्पताल संचालकों के पास अब और इंतजार करने का विकल्प नहीं बचा है। वो लोग पहले ही कई बार सरकार से लिखित और मौखिक रूप में गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। अब आज यानी मंगलवार को सरकार के साथ एक अहम बैठक होनी है, जिसमें अस्पतालों की मांगों पर ठोस फैसला लिया जाना है। अगर बात नहीं बनी, तो इलाज बंद करना तय माना जा रहा है।
Ayushman Bharat Haryana: इस पूरे मसले ने सरकार की योजनाओं की ज़मीनी हकीकत को सामने ला दिया है। जहां एक तरफ पीएम मोदी इस योजना को देशभर में गरीबों के लिए ‘संजीवनी’ बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में इससे जुड़ी अव्यवस्था और देरी इस योजना की साख पर सवाल खड़े कर रही है। अस्पतालों का दावा है कि उन्हें दवाइयों, उपकरणों, डॉक्टरों और स्टाफ की सैलरी का खर्च भी अब मुश्किल से निकालना पड़ रहा है।
सरकार को अब वक्त पर फैसला लेना होगा, वरना आयुष्मान भारत योजना के नाम पर सिर्फ कागजों में इलाज होगा, जमीन पर नहीं।
Ayushman Bharat Haryana (If you want in table format for clarity):
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल निजी अस्पताल | 675 |
| बकाया भुगतान | ₹500 करोड़ |
| मंजूर की गई राशि | ₹310 करोड़ |
| अस्पतालों तक पहुंचने का समय | 1 महीना (अनुमानित) |
| संभावित प्रभाव | गरीब मरीजों का इलाज बंद |
